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ग्रामीण इलाकों में 700 एकड़ में अफीम की खेती, फसल को नष्ट करना भी पुलिस के लिए चुनौती...

रांची: राजधानी रांची के ग्रामीण इलाकों में धड़ल्ले से अफीम की खेती हो रही है। अफीम की खेती के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। क्योंकि जहां पिछले वर्ष 560 एकड़ में लगी अफीम की खेती को पुलिस ने नष्ट किया था। इस बार पुलिस की ओर से 700 एकड़ में लगे अफीम की खेती को नष्ट करना है। ऐसे में यह साफ हो गया है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अफीम की खेती में बढ़ोतरी हुई है।

अफीम की खेती का चौंकाने वाला आंकड़ा


सबसे अहम यह है कि पहले जहां अफीम की खेती में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती थी। अब कड़ी कार्रवाई की जा रही है। जिन लोगों की अफीम की खेती में संलिप्तता पाई जा रही है। उसके खिलाफ मामला दर्ज कर जेल भेजा जा रहा है। झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता का मानना है कि उन्होंने अफिम की खेती को लेकर जितनी स्टडी की है। उससे यह साफ हो गया है कि अफीम की खेती को सिर्फ नष्ट करने से इस पर रोक नहीं लगेगी। बल्कि इसमें संलिप्त ज्यादा से ज्यादा लोगों को जेल भेजना होगा। तभी इस पर रोक लगाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि पलामू में एसपी ने अफीम की खेती के खिलाफ कार्रवाई की। जिसमें 10 लोगों को जेल भेजा गया था। इसके बाद वहां के ग्रामीण खुद से भी अफीम की खेती को नष्ट करने में लग गए हैं। उन्होंने कहा कि रांची, खूंटी और चतरा जैसे जिलों में अफीम की खेती के खिलाफ भी ऐसे ही कार्रवाई करने की जरूरत है। ताकि लोग खुद से खेती को नष्ट करने में लग जाए।

रांची के ग्रामीण इलाकों में 700 एकड़ में अफीम

अकेले राजधानी रांची की बात करें तो 700 एकड़ से ज्यादा में अफीम की खेती की गई है। रांची के ग्रामीण एसपी सुमित अग्रवाल ने बताया कि अब तक 300 एकड़ अफीम की खेती को नष्ट किया जा चुका है और आरोपियों को जेल भेजने का भी सिलसिला शुरू हो गया है। पुलिस गांव के लोगों से भी अपील कर रही हैं कि वह खुद से खेती को नष्ट करें। उन्होंने बताया कि तमाड़, बुंडू, सोनाहातु, राहे, नामकुम और दशामफॉल थाना क्षेत्र में ज्यादा अवैध खेती होती है। खासकर तमाड़ इलाके में सबसे ज्यादा अफीम की खेती हो रही है।

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