रांची लोकसभा सीट का इतिहास
झारखंड के महत्वपूर्ण लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है रांची संसदीय क्षेत्र, जिसे सराईकेला, खरसावन और रांची जिलों के कुछ हिस्सों को मिलाकर बनाया गया है।बता दें कि रांची लोकसभा सीट के तहत छह विधानसभा की सीटें आती हैं, जिनमें इच्छागढ़, सिल्ली, खिजरी, रांची, हटिया, कनके शामिल हैं। इसमें कनके विधानसभा सीट अनुसूचित जाति और खिजरी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।
झारखंड का तीसरा बड़ा शहर रांची
रांची झारखंड का तीसरा सबसे प्रसिद्ध यह शहर यहां की राजधानी भी है। रांची को झरनों का शहर भी कहा जाता है। इस क्षेत्र को भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का गृहनगर होने के लिए जाना जाता है। गोंडा हिल और रॉक गार्डन, मछली घर, बिरसा जैविक उद्यान, टैगोर हिल, मैक क्लुस्किगंज और आदिवासी संग्राहलय इसके प्रमुख पर्यटक स्थल हैं।
रांची लोकसभा सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर
रांची लोकसभा सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है। इस सीट से भाजपा के टिकट से रामटहल चौधरी पांच बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। वह 1991, 1996, 1998, 1999 और 2014 में यहां के सांसद रह चुके हैं। हालांकि, इस मामले में कांग्रेस भी पीछे नहीं है। इस सीट से कांग्रेस के प्रशांत कुमार घोष रांची से तीन बार सांसद चुने गए हैं। वह यहां से 1962, 1967 और 1971 में लगातार तीन बार सांसद रह चुके हैं। उनके अलावा, सुबोधकांत सहाय भी 1989, 2004 और 2009 में इस सीट से सांसद चुने जा चुके हैं।
इस बार यशस्विनी और संजय सेठ का आमना- सामना
हालांकि, साल 2014 और 2019 में हुए चुनावों में इस सीट से कांग्रेस को भाजपा से हार का सामना करना पड़ा। 2014 के चुनाव में भाजपा के 4,48,729 वोटों से जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय 2,49,426 वोटों से संतोष रहना पड़ा था।2019 के चुनाव में भाजपा के संजय सेठ को 7,06,828 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय को 4,23,802 वोट हासिल कर पाए। यानी कि संजय सेठ ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सुबोधकांत को 2,83,026 मतों से हराया। इस साल कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय की बेटी यशस्विनी सहाय को चुनावी मैदान में उतारा है और उनका मुकाबला भाजपा के संजय सेठ जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी से है।
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